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खरसौदकलां पंचायत में पानी और सड़क को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, पंचायत कार्यालय में किया हंगामा; कुर्सियां-टेबल फेंककर जताया विरोध!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील अंतर्गत खरसौदकलां पंचायत शुक्रवार को उस समय सुर्खियों में आ गई, जब पानी और सड़क की समस्याओं से जूझ रहे दर्जनों ग्रामीण—खासकर महिलाएं—पंचायत कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी करने लगीं। ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने पंचायत में रखी कुर्सियां और टेबल उठाकर फेंक दीं। मामला तब और गरम हो गया जब सरपंच आनंदीलाल डाबी और उपसरपंच माया पटेल मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे नाराजगी और बढ़ गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। पहले पानी टंकी से घर-घर आपूर्ति होती थी, लेकिन मौजूदा पंचायत ने नर्मदा जल योजना के नाम पर पुरानी नल लाइन ही हटवा दी। नतीजा ये हुआ कि अब न टंकी से पानी मिल रहा है और न ही नर्मदा का पानी गांव तक पहुंच पा रहा है। माली मोहल्ला, गाड़ी चौक और मफतपुरा जैसे मोहल्लों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बताई गई है। महिलाएं रोजाना पानी के लिए भटक रही हैं, और प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुकी हैं।
पेयजल के अलावा सड़क को लेकर भी ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि पाटीदार समाज धर्मशाला से लेकर गवड़ी तक सड़क बनाने की घोषणा तो हो चुकी है, लेकिन महीनों बाद भी काम की शुरुआत नहीं हो पाई है। अब बरसात नजदीक है और रास्ते कीचड़ व दलदल में तब्दील होने लगे हैं, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जब गांववाले शिकायत लेकर पंचायत कार्यालय पहुंचे तो सरपंच और उपसरपंच की गैरमौजूदगी ने माहौल और बिगाड़ दिया। गुस्साए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने पंचायत की कुर्सियां और टेबल उठाकर बाहर फेंक दीं। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं जोरदार नारेबाजी और विरोध करती दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब और चुप नहीं बैठेंगे, जब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता।
सरपंच आनंदीलाल डाबी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन बारिश की वजह से निर्माण कार्य में बाधा आई है। उन्होंने पंचायत में हुई तोड़फोड़ को गंभीर बताया और कहा कि सचिव ईश्वर गेहलोत को भी विरोध के दौरान कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नुकसान का जायजा लेकर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि पंचायत की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो और पेयजल व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द बहाल की जाएं। स्थिति अगर यूं ही बनी रही, तो आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।